Antaragni
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  • कहानी : भाभी की गीली पैन्टी -4

    अब तक आपने पढ़ा..
    मैं- मैं क्या कर रहा हूँ भाभी..?
    भाभी- आआअहह.. स..ससस्स.. सस्स.. सेक्शकशकश..
    मैं- हिन्दी में बोलो न..
    भाभी- इसस्स्स्स्स्शह.. तुम मुझे चोद रहे हो..
    भाभी के मुँह से ये सब सुनते ही मैंने ‘घाप’ से पूरा लंड भाभी की चूत में घुसा दिया।

    अब आगे..

    मैंने भाभी के झूलते बोबे पकड़ लिए और ‘घपाघप’ बिना रुके भाभी की चूत को पेलता रहा।
    भाभी- आअह.. आआह.. इसस्स्स्स्शह.. राहुल्ल्ल्ल.. आआअहह..

    पूरी रसोई में मेरी जाँघों और भाभी के चूतड़ों के भिड़ने की आवाज़ गूँज रही थी। करीब 7-8 मिनट की लगातार चुदाई के बाद मैं ज़ोर से चीखा और भाभी के अन्दर ही झड़ गया।
  • कहानी : मेरे लण्ड का नसीब -4

    अब तक आपने पढ़ा..

    मोनिका के पति ने कहा- आप समाज के सामने ये शादी मत करना। आप सिर्फ उसके साथ शारीरिक संबंध बना कर उसे औरत बना दीजिए और हमें बदनामी से बचा लीजिए।
    मैंने उसे चुप करवाया और मोनिका से कहा- आप दूसरे कमरे में चली जाओ.. मैं इनसे अकेले में बात करना चाहता हूँ।

    तभी मेरे दिमाग में एक योजना आई। मैंने अपने लैपटाप का कैमरा चालू कर दिया और आकर उसके पास बैठ गया। मैंने कहा- मुझे अपना भाई समझो.. और पूरी बात खुलकर बताओ।
    उसने वही बात फिर से कही तो वो पूरी बात मेरे लैपटाप में रिकार्ड होती चली गई.. जिसे मोनिका भी छुप कर देख रही थी।
  • कहानी : मैं जन्नत की सैर कराऊँगी -2

    उसके बाद बब्लू खड़ा हुआ और सिन्धवी के दोनों पैरों के बीच खड़ा हो गया और अपने 8 इंची लौड़े से मूठ मारने लगा।
    करीब दो मिनट बाद उसके लन्ड से फव्वारे सा वीर्य छूट कर सिन्धवी के पूरे जिस्म पर गिर गया।
    उसके बाद बब्लू ने फिर कुत्ते जैसी पोजिशन ली, और लपलपाती हुई जीभ से उसने सिन्धवी के पूरे बदन को चाटा और साफ कर दिया, इस बीच वो मुझ पर भी नजर रखी हुए थी कि मैं कहीं अपने जिस्म से छेड़छाड़ तो नहीं कर रहा हूँ।

    फिर वो उठी और बाथरूम में जा कर नहाने लगी और बब्लू भी नीचे चला गया लेकिन बब्लू ने मेरी तरफ देखा भी नहीं।
  • कहानी : मेरा गुप्त जीवन- 22

    बसन्ती सोते सोते सेक्स करती थी
    मैंने अपना पायजामा खोला और खड़े लंड को उसकी चूत पर टिका दिया।
    तभी देखा कि उसने भी झट से अपनी टांगें पूरी खोल कर फैला दी जिस वजह से मुझ को लंड को उसकी चूत में डालने में कोई दिक्कत आई।

    मैं लंड डाल कर धीरे धीरे धक्के मारने लगा, मेरा हिलना बस ना के बराबर था, धीरे से लंड अंदर और फिर धीरे से बाहर।
    कोई 10 मिनट बाद उसका शरीर एकदम अकड़ा और वह पानी छोड़ बैठी।
    मैं भी चुपके से उस के ऊपर से उतरा और उसके ऊपर पहले धोती और चादर ठीक कर दी और आ कर अपने बिस्तर पर लेट गया और जल्दी ही मैं सो गया।

  • कहानी : धोबी घाट पर माँ और मैं -11

    ओह माँ, दिखा दो ना, बस एक बार। सिर्फ़ देख कर ही सो जाऊँगा।’
    पर माँ ने मेरे हाथों को झटक दिया और उठ कर खड़ी हो गई, अपने ब्लाउज़ को ठीक करने के बाद छत के कोने की तरफ चल दी।

    छत का वो कोना घर के पिछवाड़े की तरफ पड़ता था और वहाँ पर एक नाली जैसा बना हुआ था जिससे पानी बह कर सीधे नीचे बहने वाली नाली में जा गिरता था।

    माँ उसी नाली पर जा के बैठ गई, अपने पेटिकोट को उठा के पेशाब करने लगी।
    मेरी नजरें तो माँ का पीछा कर ही रही थी, यह नज़ारा देख कर तो मेरा मन और बहक गया, दिल में आ रहा था कि जल्दी से जाकर माँ के पास बैठ कर आगे झांक लूँ और उसकी पेशाब करती हुई चूत को कम से कम देख भर लूँ।
  • कहानी : भाभी की गीली पैन्टी -3

    अब तक आपने पढ़ा..
    मैंने बाथरूम की कुण्डी लगा कर.. पजामा नीचे करके मोबाइल ऑन किया.. उसमें एक वीडियो था.. मैंने उसे प्ले किया।
    वीडियो चलते ही मैं चौंक गया.. वीडियो में भाभी नाइटी पहन कर बैठी थी और मुठ्ठ मारने के लिए उकसा रही थीं.. मैंने भाभी की मादक और कामुक अदाओं को सुनते-देखते हुए मुठ्ठ मारी.. सच में बड़ा मज़ा आया।

    मैंने बाहर आकर भाभी को ‘थैंक्यू’ कहा और उन्हें मोबाइल वापिस दे दिया।
    मैं- यह आपने कब बनाया?
    भाभी- मुझे तुझ पर पूरा यकीन था.. मैंने ये वीडियो तेरे सेकंड टर्म के रिज़ल्ट के बाद ही बना लिया था।

    मैं अब फाइनल्स की तैयारी मैं जुट गया। मैं कुत्तों की तरह रात-दिन एक करके पढ़ रहा था। भाभी भी मेरे खाने-पीने और सेहत का पूरा ध्यान रखती थीं।
  • कहानी : मेरे लण्ड का नसीब -3

    अब तक आपने पढ़ा..
    कुछ देर बाद हम दोनों बाथरूम में चले गए। बाथरुम में शावर के नीचे नहाने लगे।
    मेरा लंड फिर तन गया। दर्द तो मुझे भी महसूस हुआ। लेकिन चूत के मजे के सामने ये दर्द कुछ भी नहीं था।
    मैंने उसका एक पैर कमोड पर रखवा कर उसको उल्टा कर दिया और सवा घण्टे तक उर्मिला की चूत की चुदाई की।
    फिर हम नहा कर बाहर आ गए। अब रात के 2 बज चुके थे।

    मैंने कहा- अब हमें सोना चाहिए.. सुबह मुझे कम्पनी भी जाना है।
    उसने कहा- ठीक है.. मैं भी थक गई हूँ।
  • कहानी : बहन का लौड़ा -68

    अभी तक आपने पढ़ा..
    आयुष के मुँह से ये बात सुनकर रोमा को झटका लगा कि टीना ने आयुष को सब बता दिया है।
    रोमा- आयुष प्लीज़ इस टॉपिक पर मुझे कोई बात नहीं करनी और ना ही मुझे दोस्ती करनी है.. हटो मेरे सामने से.. मुझे टीना से मिलना है।
    रोमा गुस्से में अन्दर चली गई। टीना उस समय चाय पी रही थी.. उसने रोमा को चाय के लिए पूछा.. मगर उसने मना कर दिया और मौका देख कर टीना को कमरे में ले गई।
    टीना- अरे क्या हुआ.. बता तो.. ऐसे गुस्से में मुझे क्यों अन्दर ले आई?
    रोमा- टीना हमने वादा किया था कि वो बात किसी को नहीं बताएँगे और तूने अपने भाई को बता दी.. छी:.. तुम्हें उसको वो सब बताते हुए शर्म नहीं आई।
    टीना- तेरा दिमाग़ खराब हो गया है.. भला में क्यों बताऊँगी?
    रोमा ने टीना को पूरी बात बताई तो टीना हैरान हो गई।
    टीना- नहीं नहीं.. कुछ तो गड़बड़ है.. भाई को कैसे पता चला..?
    अब आगे..

  • कहानी : मैं जन्नत की सैर कराऊँगी -1

    दोस्तो, एक बार फिर आप सबके सामने आपका प्यारा शरद एक नई कहानी के साथ हाजिर है। लेकिन इस बार कहानी में जरा सी कल्पना भी है। इस कल्पना के बिना यह कहानी अधूरी रहती, तो तैयार हो जाइए इस नई कहानी को पढ़ने के लिये।

    दोस्तो, जिस कालोनी में मैं रहता हूँ, उस कालोनी में मेरे सामने खाली पड़े अर्पाट्मेन्ट में रात करीब 10 बजे एक ट्रक रूका। जिसमें घरेलू सामान लदा हुआ था।
    पीछे एक लाल रंग की कार थी जिससे कुल चार लोग उतरे। एक पतली दुबली करीब 38 वर्षीय महिला, एक लगभग 42 साल का आदमी, एक किशोरवय लड़का जो उनके घर का नौकर होगा और एक निहायत खूबसूरत लड़की जिसकी उम्र शायद 18-19 की होगी।
  • कहानी : अठरह वर्ष पूर्व दिए गए वचन का मान रखा-2

    लेखिका : नलिनी रविन्द्रन
    अनुवादक एवं प्रेषिका: तृष्णा लूथरा
    खाना समाप्त करने के बाद हम दोनों बैठक में बैठ कर उसके बचपन की भूली बिसरी बातें याद करके उन पर चर्चा करने लगे।
    मुझे चर्चा के दौरान हैरानी और संकोच तब हुई जब नागेन्द्र ने उसके द्वारा मेरे दूध पीने के लिए जिद करने के बारे में याद कराया।

    मैं तो समझती थी कि वह बड़ा हो गया है इसलिए बचपन की बातें समय के साथ भूल गया होगा लेकिन उसके मुँह से उस घटना का विस्तृत विवरण सुन कर मैंने झेंप कर चर्चा को बंद कर दिया तथा वहाँ से उठ गई।
    इसके थोड़ी देर के बाद भाभी आ गई तब नागेन्द्र ने मुझसे और उनसे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करा कर फैक्ट्री चला गया।
  • कहानी : मेरा गुप्त जीवन- 21

    नई लड़की बसन्ती मेरे कमरे में सोई
    पहले चम्पा और अब फुलवा दोनों ही गर्भवती हो गई तो मुझको ऐसा नहीं महसूस हुआ कि उन दोनों को गर्भवती करने में मेरा कोई रोल है लेकिन एक दिन चम्पा और फुलवा मुझको मिलने आई उसी कॉटेज में, दोनों के चेहरे चमक रहे थे और दोनों बेहद खुश थी।
    चम्पा का चौथा माह चल रहा था और फुलवा अभी तीसरे माह में थी, दोनों ही मेरा आभार प्रकट कर रही थीं लेकिन मैं नहीं मान रहा था कि दोनों को गर्भवती मैंने बनाया है। मैं उनके पतियों को ही अपनी पत्नियों को गर्भवती करने का पूरा श्रेय देता था।

  • कहानी : माही के प्यार की प्यास

    अंतराग्नि के सभी पाठकों को मेरा तहे दिल से नमस्कार। मेरा नाम राहुल शर्मा है। मैं मथुरा शहर का रहने वाला हूँ। मेरा शरीर मध्यम आकार का है।
    यह कहानी मेरी पहली आपबीती है.. बात उन दिनों की है जब मैं बी.टेक. के अंतिम वर्ष में था.. तभी फ़ोन पर मेरी बात एक लड़की से हुई। तब तक मैंने किसी भी लड़की से कभी बात नहीं की थी.. तो सब बड़ा ही अच्छा लग रहा था।
    मुझे उसकी आवाज़ इतनी अच्छी लगी कि मैंने दोबारा फ़ोन करके उससे बात करनी चाही।

    पहले मैंने उससे उसका नाम पूछा.. तो उसने अपना नाम सपना कुमार बताया जो मुझे बहुत ही अजीब लगा.. कि सपना तक तो ठीक है पर उसके साथ कुमार क्यों? पर मैंने सोचा कि शायद यह भी कोई सरनेम होता होगा।
    इसी तरह उससे मेरी बातचीत होती रही और हम अच्छे दोस्त बन गए।